बीमा क्लेम का भुगतान करने में आनाकानी, चोला मंडलम जनरल इंश्योरेंस कंपनी तथा एचडीएफसी बैंक को एक महीने के भीतर ब्याज व जुर्माना सहित भुगतान करने का आदेश - NEWSSEARCH

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बीमा क्लेम का भुगतान करने में आनाकानी, चोला मंडलम जनरल इंश्योरेंस कंपनी तथा एचडीएफसी बैंक को एक महीने के भीतर ब्याज व जुर्माना सहित भुगतान करने का आदेश

बीमा क्लेम का भुगतान करने में आनाकानी, चोला मंडलम जनरल इंश्योरेंस कंपनी तथा एचडीएफसी बैंक को एक महीने के भीतर ब्याज व जुर्माना सहित भुगतान करने का आदेश

न्यूज सर्च@जांजगीर-चांपा। बीमा दावा का भुगतान करने में आनाकानी करने के कारण उपभोक्ता फोरम ने चोला मंडलम जनरल इंश्योरेंस कंपनी तथा एचडीएफसी बैंक को एक महीने के भीतर ब्याज व जुर्माना सहित भुगतान करने का फैसला सुनाया है। जिले के सुकली निवासी विजय करियारे के अनुसार, उसने चारपहिया वाहन क्रय किया था जिसका बीमा चोला मंडलम जनरल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। बीमा अवधि में ही वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। वाहन मरम्मत में 6 लाख रुपए खर्च हुआ, जिसके एवज में नियमानुसार 3 लाख 2 हज़ार 373 रुपए का दावा किया गया, लेकिन कंपनी द्वारा निजी वाहन के व्यावसायिक उपयोग करने का हवाला देते हुए बीमा दावा का भुगतान करने से इंकार कर दिया गया। मामले में उपभोक्ता फोरम की अध्यक्ष श्रीमती तजेश्वरी देवी देवांगन तथा सदस्य मनरमण सिंह ने सुनवाई करते हुए पाया कि कंपनी द्वारा बीमा दावा का भुगतान नहीं करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। फोरम ने फैसला सुनाते हुए चोला मंडलम जनरल इंश्योरेंस कंपनी को एक माह के भीतर 3 लाख 2 हज़ार 373 रुपए ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 10 हजार रुपए तथा वाद व्यय स्वरूप 2000 रुपए देने का फैसला सुनाया है। इसी तरह ओडेकेरा जैजैपुर निवासी दिगेश्वर आदित्य तथा उसके भाई दीपकुमार आदित्य का संयुक्त खाता है। उक्त एकाउंट में एटीएम की सुविधा है, जिससे नियमित लेनदेन किया जाता है और इसमें बीमा है, लेकिन दीपकुमार की दुर्घटना में मौत के बाद बैंक द्वारा बीमा दावा का भुगतान करने आनाकानी की जा रही थी। उपभोक्ता फोरम में आवेदन करने के बाद सुनवाई करते हुए फोरम की अध्यक्ष श्रीमती तजेश्वरी देवी देवांगन तथा सदस्य मनरमण सिंह ने बैंक द्वारा सेवा में कमी मानते हुए एक माह के भीतर बीमा की रकम 2 लाख रुपए भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 10 हजार रुपए तथा वाद व्यय स्वरूप 2000 रुपए भुगतान करने का फैसला सुनाया है।

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