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समाज सेवा की आड़ में कर्फ्यू का उल्लंघन, राहत शिविर फुर्र

न्यूज़ सर्च@सारंगढ़:-कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने 14 अप्रैल तक कि गई लॉकडाउन से परेशान लोगों को घर से बाहर निकलकर अपना समय बिताना है तो समाज सेवा के नाम पर कुछ फल एवं अनाज  लेकर शहर की गलियों में घूमकर सामान बांटना एवं फोटो खिंचवाना इन दिनों कुछ ज्यादा ही दिखलाई पड़ रहा है इसके साथ ही अधिकारी भी फ़ोटो सूट में पीछे नही हो रहे हैं कई लोगों को मेरा यह लेख बिल्कुल ही अच्छा नही लगेगा और मुझे बहुत से लोग गालियां भी देंगे लेकिन परवाह नही है क्योंकि यह कड़वी सच्चाई है ऐसा करने से लॉक डाउन कानून का उल्लंघन होने के साथ ही कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए किये जा रहे प्रयास पर पानी फिर रहा है यदि ऐसे समाज सेवियों को सेवा ही करना है तो उन लोगों को सबसे ज्यादा आपकी सेवा की जरूरत है जो चार पांच दिनों से बिना खाये पिये अपने परिवार के साथ रहने अन्य प्रदेशों से वापस लौट रहे हैं जिनको कहीं पर भी दो वक्त की रोटी और पानी भी मिलना मुश्किल हो गया है कहीं भी पुलिस की जांच बेरियर एवं चौकियों में ऐसे लोगों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था नही दिखलाई पड़ रही है शासन प्रशासन की सारी मानवीयता कहाँ चली गई है राहगीर (प्रवासी)लोगों के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है जैसे रोजी मजदूरी करने जाना बहुत बड़े गुनाह किया हो गरीबों को गाली और अमीरों को पास ये कौन सी नीति है और किसने यह नीति नियम बनाया है सरकारी नुमाईन्दे जिस प्रकार से अपना ईमानदारी जोर आजमाईश में दिखा रहे हैं अगर ऐसा ही जोश वो लोगों को जागरूक करने में लगायें तो शायद ही कोई कोरोना की चपेट में आता लेकिन यहां खासकर रायगढ़ जिले की जांच चौकियों बैरियर में तैनात पुलिस के जवानों पर कोरोना की खतरा बहुत अधिक बढ़ रहा है साथ ही गली मोहल्ला के बीच लगे बेरियर तो बिल्कुल भी सुरक्षित नही हैं ऐसे सभी बेरियर को गलियों से दूर कर सीमा बार्डर में लगाया जाये और उन बेरियर में तैनात सुरक्षा कर्मियों को हैंडवाश लिक्विड,सेनिटाइजर,हैंड ग्लोब व मास्क व पानी की सुविधा दी जाये लेकिन ऐसी सुविधा देने वाले एक भी समाज सेवी दिखलाई नही पड़ रहे हैं साथ ही ऐसे जांच बेरियर में कई दिनों की सफर के साथ भूख की पीड़ा से कुलबुलाती वाहन चालकों एवं राहगीरों की पीड़ा को हरने वाली राहत शिविर की व्यवस्था करने में सहयोग देने वाले भी दूर दूर तक कहीं नजर नही आ रहे हैं इसलिये मैं कहता हूँ आपको दिन भर घर मे बंद रहने की घुटन से छुटकारा पाना है तो अपने गली के आसपास निकलो और जिनके पास खाने पीने के लिए महीनों भर का राशन है उन्ही के घरों में अनाज छोड़ जावो और जिनको सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं खाद्यान्न सुरक्षा अधिनियम के तहत अब तक कोई लाभ नही मिल रहा है पांच साल पहले जिनको एकल राशनकार्ड के नाम पर राशन काट दिया गया उनको भूखे मरने छोड़ दो क्योंकि आपको सेवा नही करना है थोड़ा राशन पकड़कर एक गली से दूसरा गली घूमना है वह भी .........

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