न्यूज़ सर्च@रायपुर:- कोरोना महामारी की वजह से जहां एक ओर छत्तीसगढ समेत पूरा विश्व इस समस्या से जूझ रहा है वहीं दूसरी ओर लॉकडाउन की वजह से वातावरण और जल की प्रदूषण में लगातार कमी आ रही है। इसका साफ असर खारून नदी में देखने को मिल रहा है जहां पानी एकदम साफ हो गया है। सिटी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार बीरगांव नगर निगम की जनता लम्बे समय से गंदे और प्रदूषित पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रही है।
खारून नदी से बीरगाव नगर निगम को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। फैक्टरियों से निकल रहे एसिड युक्त गंदा पानी नाला से होकर खारून नदी में मिल जाता है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो जाता है। तमाम प्रयासों के बाद भी बीरगांव नगर निगम का फिल्टर प्लांट शुद्ध पेयजल लोगों को पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहा है। कोरोना संक्रमण रोकने के लिये लॉकडाउन की वजह से क्षेत्र की सभी औधोगिक इकाइयां पिछले पंद्रह दिनो से पूर्णतः बंद है, जिस कारण फैक्ट्रियों का गंदा पानी अब नदी में जाना पूर्ण रूप से बंद हो गया है, फलस्वरूप खारुन नदी का जल निर्मल हो रहा है। इससे बीरगांव नगर निगम ने राहत की सांस ली है। बीरगांव के रहवासियों को बरसों बाद पीने के लिए शुद्ध जल मिलने लगा है। आश्चर्य जनक ढंग से खारून नदी की टर्बिडिटी (गंदगी)और टोटल डिज़ाल्ट साइट (टीडीएस) में सुधार आया है। लॉकडाउन के पहले जहां टीडीएस 1800 के पार पहुंच गया था जिस कारण पानी को शुद्ध करने में नगर निगम को बहुत परेशानी हो रही थी। लेकिन अब लॉकडाउन के बाद यह घटकर 300 के पास पहुंच गया है। इससे निगम को पानी को फिल्टर करने में दिक्कत नहीं हो रहा है। वही नदी के पानी की क्वालिटी में एसिडिक और रेसिड्यूल क्लोरिक की मात्रा अब सामान्य स्तर पर आ गया है। नगर निगम द्वारा प्रतिदिन पानी की शुद्धता की जांच की जाती है, जिसमें पानी की टर्रबीडीटी, पानी का कलर, क्वालिटी और रीशेड्यूल क्लोरीन की मात्रा जांची जाती है। प्रत्येक 2 माह में एक बार पानी की जाांच पीएचई के प्रयोगशाला में की जाती है। ज्ञात हो बीरगांव नगर निगम में कुल आबादी सवा लाख के करीब है। 6 गांव उरला अछोली सरोरा रावा भांठा, उरकुरा और बिरगांव को मिलाकर 40 वार्ड का यह नगर निगम एक औद्योगिक क्षेत्र है, बीरगांव में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 800 औद्योगिक उद्योग संचालित है,जिसका गंदा पानी उद्योग से निकलकर नाला के माध्यम से खारून नदी में जाकर मिलता है। नाले से रायपुर नगर निगम के अंतर्गत कुछ इलाके का गंदा पानी भी आकर खारुन नदी में मिलता है, इसके अलावा उद्योगों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी भी खारून नदी स्थित इन्टकवेल के पास मिलता है। नदी में केमिकल युक्त पानी आने से पानी लगातार विषैला होता जा रहा है।
खारून नदी से बीरगाव नगर निगम को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। फैक्टरियों से निकल रहे एसिड युक्त गंदा पानी नाला से होकर खारून नदी में मिल जाता है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो जाता है। तमाम प्रयासों के बाद भी बीरगांव नगर निगम का फिल्टर प्लांट शुद्ध पेयजल लोगों को पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहा है। कोरोना संक्रमण रोकने के लिये लॉकडाउन की वजह से क्षेत्र की सभी औधोगिक इकाइयां पिछले पंद्रह दिनो से पूर्णतः बंद है, जिस कारण फैक्ट्रियों का गंदा पानी अब नदी में जाना पूर्ण रूप से बंद हो गया है, फलस्वरूप खारुन नदी का जल निर्मल हो रहा है। इससे बीरगांव नगर निगम ने राहत की सांस ली है। बीरगांव के रहवासियों को बरसों बाद पीने के लिए शुद्ध जल मिलने लगा है। आश्चर्य जनक ढंग से खारून नदी की टर्बिडिटी (गंदगी)और टोटल डिज़ाल्ट साइट (टीडीएस) में सुधार आया है। लॉकडाउन के पहले जहां टीडीएस 1800 के पार पहुंच गया था जिस कारण पानी को शुद्ध करने में नगर निगम को बहुत परेशानी हो रही थी। लेकिन अब लॉकडाउन के बाद यह घटकर 300 के पास पहुंच गया है। इससे निगम को पानी को फिल्टर करने में दिक्कत नहीं हो रहा है। वही नदी के पानी की क्वालिटी में एसिडिक और रेसिड्यूल क्लोरिक की मात्रा अब सामान्य स्तर पर आ गया है। नगर निगम द्वारा प्रतिदिन पानी की शुद्धता की जांच की जाती है, जिसमें पानी की टर्रबीडीटी, पानी का कलर, क्वालिटी और रीशेड्यूल क्लोरीन की मात्रा जांची जाती है। प्रत्येक 2 माह में एक बार पानी की जाांच पीएचई के प्रयोगशाला में की जाती है। ज्ञात हो बीरगांव नगर निगम में कुल आबादी सवा लाख के करीब है। 6 गांव उरला अछोली सरोरा रावा भांठा, उरकुरा और बिरगांव को मिलाकर 40 वार्ड का यह नगर निगम एक औद्योगिक क्षेत्र है, बीरगांव में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 800 औद्योगिक उद्योग संचालित है,जिसका गंदा पानी उद्योग से निकलकर नाला के माध्यम से खारून नदी में जाकर मिलता है। नाले से रायपुर नगर निगम के अंतर्गत कुछ इलाके का गंदा पानी भी आकर खारुन नदी में मिलता है, इसके अलावा उद्योगों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी भी खारून नदी स्थित इन्टकवेल के पास मिलता है। नदी में केमिकल युक्त पानी आने से पानी लगातार विषैला होता जा रहा है।


