न्यूज सर्च@रायपुर. राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रायपुर में 15 अक्टूबर को भारतीय वन सेवा के उच्च अधिकारियों के लिए ''सतत् मानव विकास में वानिकी का योगदान विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। प्रशिक्षण में तमिलनाडू, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, झारखण्ड, गुजरात, केरल, मणिपुर, मेघालय, मध्यप्रदेश, असम, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक तथा उड़ीसा सहित देश कुल 14 राज्य से आए 22 भारतीय वन सेवा के उच्च अधिकारियों ने प्रशिक्षण लिया। कार्यशाला में वानिकी संबंधी महत्वपूर्ण तकनीकी सत्रों के साथ-साथ प्रदेश में वानिकी के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों तथा छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना ''छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी - नरवा, गरुवा, घुरवा बाड़ी- ऐला बचाना है संगवारी का अध्ययन भी कराया गया।
कार्यशाला के समापन सत्र में आयुक्त एवं सचिव, मनरेगा टी.सी. महावर ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य जहां पर 44 प्रतिशत वन आच्छादित क्षेत्र है और 33 प्रतिशत जनजातियां निवास करती हैं, वहां वनों से प्राप्त वनोपजों एवं अन्य वस्तुएं न केवल स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं बल्कि उनकी आजीविका का भी आधार हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मार्गदर्शन में राज्य की महत्वपूर्ण ''छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी - नरवा, गरुवा, घुरवा बाड़ी- ऐला बचाना है संगवारी के उद्देश्य के साथ छत्तीसगढ़ में सतत् विकास के लिए एक अभिनव परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। कार्यक्रम में वन बल प्रमुख डॉ. आर.के. सिंह, सचिव राज्यपाल सोनमणी बोरा, पूर्व प्रमुख सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास पी.सी. मिश्रा आदि उपस्थित थे।
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