न्यूज़ सर्च@नई दिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। 9 नवंबर 2019 को यहां की सरकार का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इसे देखते हुए चुनाव आयोग ने भी यहां चुनाव की घोषणा कर दी है। तय
के मुताबिक यहां 21 अक्टूबर को मतदान और 24 को मतगणना है।
महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन से वर्तमान में सरकार चल रही है, लेकिन इस बार यह गठबंधन होने में काफी मुश्किलें दिख रही हैं । एक तरफ जहां बीजेपी अपने आप को बड़े भाई के रूप में राज्य में देखना चाहती है तो वहीं शिवसेना को यह कहीं से बर्दाश्त होता नहीं दिख रहा है। शिवसेना का कहना है कि वह राज्य में बराबरी का दर्जा चाहती है। उसने गठबंधन के लिए 288 विधानसभा सीटों में 135-135 सीटों पर चुनाव लड़ने की शर्त रखी है। शेष 18 सीटें सहयोगियों के लिए छोड़ने की बात कही जा रही है। हालांकि बीजेपी इस तरह के गठबंधन के लिए तैयार नहीं दिख रही है। बीजेपी का मानना है कि शिवसेना को 100 सीटों से अधिक पर चुनाव लड़ने नहीं देना चाहिए। दोनों दलों के खींचतान में यदि यह गठबंधन नहीं हुआ तो बीजेपी और शिवसेना अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे। इसका नुकसान इन दोनों ही दलों को हो सकता है । राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि यह गठबंधन नहीं हुआ तो निश्चित तौर पर इसका लाभ राज्य में कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन को मिलेगा।
के मुताबिक यहां 21 अक्टूबर को मतदान और 24 को मतगणना है।
महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन से वर्तमान में सरकार चल रही है, लेकिन इस बार यह गठबंधन होने में काफी मुश्किलें दिख रही हैं । एक तरफ जहां बीजेपी अपने आप को बड़े भाई के रूप में राज्य में देखना चाहती है तो वहीं शिवसेना को यह कहीं से बर्दाश्त होता नहीं दिख रहा है। शिवसेना का कहना है कि वह राज्य में बराबरी का दर्जा चाहती है। उसने गठबंधन के लिए 288 विधानसभा सीटों में 135-135 सीटों पर चुनाव लड़ने की शर्त रखी है। शेष 18 सीटें सहयोगियों के लिए छोड़ने की बात कही जा रही है। हालांकि बीजेपी इस तरह के गठबंधन के लिए तैयार नहीं दिख रही है। बीजेपी का मानना है कि शिवसेना को 100 सीटों से अधिक पर चुनाव लड़ने नहीं देना चाहिए। दोनों दलों के खींचतान में यदि यह गठबंधन नहीं हुआ तो बीजेपी और शिवसेना अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे। इसका नुकसान इन दोनों ही दलों को हो सकता है । राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि यह गठबंधन नहीं हुआ तो निश्चित तौर पर इसका लाभ राज्य में कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन को मिलेगा।


