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क्या असली राज कैसे अमेजन और फ्लिपकार्ट देती हैं इतनी भारी भरकम छूट

न्यूज़ सर्च@रायपुर। कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स  (कैट) ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयुष गोयल को पत्र लिखकर मांग की है कि वे अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी प्रमुख कंपनियों का आडिट कराएं, जिससे यह पता चल सके कि वे इतने बड़े बड़े डिस्काउंट प्रोडक्ट पर कैसे देती हैं।
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कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर परवानी, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मगेलाल मालू, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, प्रदेश महामंत्री जितेंद्र दोशी, प्रदेश कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं प्रदेश प्रवक्ता राजकुमार राठी ने पत्र लिखकर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से सभी प्रमुख ब्रांड कंपनियों की बैठक बुलाने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि 11 अक्तूबर को वाणिज्य मंत्रालय में कैट और अमेज़ॅन एवं फ्लिपकार्ट के साथ हुई मीटिंग में अमज़ोन एवं फ्लिपकार्ट ने कहा की उनके पोर्टल पर जो बड़े डिस्काउंट दिए जा रहे हैं, वो विभिन्न ब्रांड दे रहे हैं। उसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। कैट ने गोयल से यह आग्रह किया है की सरकार द्वारा इन कम्पनियों के बिज़नेस मॉडल का ऑडिट भी कराया जाए ।
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कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पारवानी  का कहना है कि ये कंपनियां पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से भारी घाटे में चल रही हैं और अभी भी वे प्रत्येक वर्ष कई तरह कीं सेल आयोजित करने के साथ अपने व्यापार मॉडल को जारी रख रही हैं। यह इसलिए सम्भव है क्योंकि इन कम्पनियों के संबंधित निवेशक घाटे का वित्तपोषण कर रहे हैं जो इन कम्पनियों को भारी छूट प्रदान करने में सक्षम बनाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि इनका पोर्टल  व्यवसाय मॉडल नहीं है बल्कि निवेशकों का एक मूल्यांकन खेल है जो उनके लिए बेहद लाभप्रद है।
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 पारवानी ने कहा कि देश के व्यापारी इन कम्पनियों की अविश्वसनीय छूट से बुरी तरह से प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित मोबाइल, एफएमसीजी, गारमेंट्स, गिफ्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल आइटम के व्यापारी हैं।
 कैट का कहना है कि “भारत (INDIA) में 7 करोड़ व्यापारियों की कारोबारी शृंखला दुनिया की सबसे बड़ी आपूर्ति श्रृंखला है, जो कि दूर दराज के क्षेत्रों में माल की डिलीवरी प्रदान करता है और राष्ट्रीय खजाने में बेहतरीन योगदान देता है और कृषि के बाद यह देश में रोजगार प्रदान करने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। इसलिए, देश के व्यापारिक समुदाय के वास्तविक हितों की रक्षा करने की तत्काल आवश्यकता है।
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