न्यूज़ सर्च@रायपुर:- विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा के नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने मीडिया से मुखातिब होते हुए धान खरीदी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा किसान और धान समस्या नहीं बल्कि कांग्रेस का घोषणा पत्र सबसे बड़ी समस्या है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि धान कटाई 60 प्रतिशत से ज्यादा हो चुकी है। प्रदेश में धान की पैदावार बहुत अच्छी है। उसके बाद भी किसानों की आर्थिक हालत खस्ता/बदहाल है। किसान अपनी फसल को 1200-1500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बेचने को बाध्य हुआ है। किसानों के नाम पर बहुमत पाने वाली सरकार किसानों को बरबाद करने में लगी हुई है। समर्थन मूल्य में धान खरीदी 01 नवम्बर से शुरू होनी थी उसे बढ़ाकर 01 दिसम्बर से खरीदी का निर्णय लिया गया है। इसके चलते किसान अपनी आवश्यकता की पूर्ति सस्ते में धान बेचकर कर रहा है। वही जो किसान समर्थन मुल्य पर धान बेचने हेतु धान रख रहा है उनका 200 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक खर्च बढ़ गया है। (खलिहान तैयार करना व सुखत के कारण)। किसान धान बेचने जा रहा है और पूरे प्रदेश में किसानों का धान जब्त किया जा रहा है। करोड़ो रुपये के धान की जब्ती बनायी जा चुकी है। प्रदेश की 50 प्रतिशत मंडियों में खरीददार नही आते जिसके चलते किसानों को बाहर धान बेचने को बाध्य होना पड़ रहा है। शासन धान की जब्ती बनाकर उन्हे प्रताड़ित कर रही है।
केन्द्र की सरकार ने किसानो को 6000 रुपये प्रति एकड़ किसान सम्मान निधी प्रदान करने का निर्णय लिया किन्तु समय सीमा में प्रदेश सरकार द्वारा औपचारिकता पूर्ण न किये जाने के कारण प्रदेश के आधे से ज्यादा किसान इसके लाभ से वंचित है। गंगाजल उठाकर किसानों के ऋण माफ करने की बात करने वाली यह सरकार किसानों के मध्यकालीन, दीर्घकालीन तथा राष्ट्रीकृत बैंको के ऋण वसुली का दबाव झेलना पड़ रहा है। प्रदेश के दो किसानों को जेल में भी भेज दिया गया।
प्रदेश में किसानों का बैल मर जाने के कारण आत्महत्या करने का प्रकरण भी सामने आया है। प्रदेश सरकार के किसान विरोधी निर्णय के कारण किसान त्रस्त है, भयभीत है जिसके चलते पूरे प्रदेश के किसानों में सरकार के विरूद्ध रोष एवं आक्रोश व्याप्त है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि धान कटाई 60 प्रतिशत से ज्यादा हो चुकी है। प्रदेश में धान की पैदावार बहुत अच्छी है। उसके बाद भी किसानों की आर्थिक हालत खस्ता/बदहाल है। किसान अपनी फसल को 1200-1500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बेचने को बाध्य हुआ है। किसानों के नाम पर बहुमत पाने वाली सरकार किसानों को बरबाद करने में लगी हुई है। समर्थन मूल्य में धान खरीदी 01 नवम्बर से शुरू होनी थी उसे बढ़ाकर 01 दिसम्बर से खरीदी का निर्णय लिया गया है। इसके चलते किसान अपनी आवश्यकता की पूर्ति सस्ते में धान बेचकर कर रहा है। वही जो किसान समर्थन मुल्य पर धान बेचने हेतु धान रख रहा है उनका 200 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक खर्च बढ़ गया है। (खलिहान तैयार करना व सुखत के कारण)। किसान धान बेचने जा रहा है और पूरे प्रदेश में किसानों का धान जब्त किया जा रहा है। करोड़ो रुपये के धान की जब्ती बनायी जा चुकी है। प्रदेश की 50 प्रतिशत मंडियों में खरीददार नही आते जिसके चलते किसानों को बाहर धान बेचने को बाध्य होना पड़ रहा है। शासन धान की जब्ती बनाकर उन्हे प्रताड़ित कर रही है।
केन्द्र की सरकार ने किसानो को 6000 रुपये प्रति एकड़ किसान सम्मान निधी प्रदान करने का निर्णय लिया किन्तु समय सीमा में प्रदेश सरकार द्वारा औपचारिकता पूर्ण न किये जाने के कारण प्रदेश के आधे से ज्यादा किसान इसके लाभ से वंचित है। गंगाजल उठाकर किसानों के ऋण माफ करने की बात करने वाली यह सरकार किसानों के मध्यकालीन, दीर्घकालीन तथा राष्ट्रीकृत बैंको के ऋण वसुली का दबाव झेलना पड़ रहा है। प्रदेश के दो किसानों को जेल में भी भेज दिया गया।
प्रदेश में किसानों का बैल मर जाने के कारण आत्महत्या करने का प्रकरण भी सामने आया है। प्रदेश सरकार के किसान विरोधी निर्णय के कारण किसान त्रस्त है, भयभीत है जिसके चलते पूरे प्रदेश के किसानों में सरकार के विरूद्ध रोष एवं आक्रोश व्याप्त है।

