आदिवासियों के शांति और सौहार्द की चादर ओढ़कर मलाई खा रहे राज्य के कर्ताधर्ता
न्यूज़ सर्च@रायपुर. आदिवासियों का राज्य कहा जाने वाला छत्तीसगढ़ आज अपराध का गढ़ बनता जा रहा है। यहां पत्रकार, नेता से लेकर पुलिस वाले तक सुरक्षित नहीं है। सभी को खुलेआम फोन पर जान से मारने (गोली बारूद से उड़ा देने) की धमकी दी जा रही है और पुलिस के होनहार थाना प्रभारी कोई कार्रवाई नहीं बनती है कहकर अपनी ड्यूटी से पल्ला झाड़ रहे हैं। वर्तमान में गांव, विकासखंड, जिला और संभाग से लेकर राजधानी तक में लोग सुरक्षित नहीं है, इसके बाद भी देश चलाने वाले मंत्री से लेकर संत्री तक शांति का चादर ओढ़कर सिर्फ और सिर्फ मलाई खाने में लगे हुए हैं।ताजा मामला बम्हनीडीह विकासखंड का ही ले लें। यहां एक पत्रकार ने अपना फर्ज निभाते हुए एसडीएम के बाबू को रिश्वत लेते रंगे हाथ एक्सपोज किया। उसके लिए उसे शासन प्रशासन से कोई बधाई संदेश तो नहीं मिला उल्टा आज उसे न्याय की लड़ाई के लिए थाने और एसडीएम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। एसडीएम बजरंग दुबे ने नोटिस जारी करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया तो वहीं थाना प्रभारी का कहना है कि जान से मारने की धमकी पर कोई कार्रवाई ही नहीं बनती है। शायद टीआई को इस बात का इंतजार है कि कब उस पत्रकार को कोई गोली मार दे उसके बाद वह जांच करे और फिर मोटी रकम लेकर फाइल को बंद करने का मौका मिले। इस बाद से पूरे पत्रकार महकमें भारी रोष है। पत्रकारों का कहना है कि यही धमकी यदि एसडीएम या फिर टीआई को मिलती तो पत्रकारों के खिलाफ रातोंरात एफआईआर दर्ज हो जाती। हुआ भी यही है। रायपुर के सीएसपी नसर सि²की और बिधायक अजय चंद्राकर को जान से मारने की धमकी मिली तो उनकी एफआईआर तुरंत दर्ज हो गई। ऐसे में क्या पत्रकार को जीने का हक नहीं या फिर पुलिस उसे कोई सुरक्षा नहीं देना चाहती।

