न्यूज़ सर्च@जगदलपुर:- छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा अंतर्गत पोटाली में खुले पुलिस कैम्प का विरोध करने हजारों की संख्या में ग्रामीण मंगलवार दोपहर पोटाली-नहाड़ी गांव पहुंचे थे। आदिवासी ग्रामीणों को खदेड़ने पुलिस ने न सिर्फ उन पर लाठी भांजी, बल्कि हवाई फायरिंग भी की।
गौरतलब है कि पोटाली कैम्प में डीआरजी, सीएएफ और जिला पुलिस बल के करीब 300 जवान रहेंगे। इसका विरोध करने हजारों की संख्या में आसपास के गांवों से ग्रामीण पहुंचे हुए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि कैम्प खुलने के बाद जवान ग्रामीणों को परेशान करेगें। अधिकारियों ने पहले तो ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं माने तो जवानों ने पहले ग्रामीणों पर लाठियां भांजी और भीड़ को तीतर बितर किया। जब ग्रामीण नहीं माने तो जवानों हवाई फायरिंग भी की।
बता दें कि नक्सलवाद के चलते 2007 के बाद से ही अरहनपुर-पोटाली मार्ग बंद है। पोटाली और आसपास के गांव में रहने वाले ग्रामीणों को अभी अपनी हर छोटी बड़ी जरूरतों के लिए कई किलोमीटर पैदल चल कर अरहनपुर पहुंचना पड़ता है। इसके साथ ही यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित भी है और ग्रामीणों को उन्हीं के बीच रहना पड़ता है ग्रामीणों को डर है कि यदि पुलिस कैंप यहां बना तो न सिर्फ नक्सलियों से व प्रताड़ित होंगे बल्कि पुलिस वाले भी उनको आए दिन पूछताछ के लिए प्रताड़ित करेंगे।
गौरतलब है कि पोटाली कैम्प में डीआरजी, सीएएफ और जिला पुलिस बल के करीब 300 जवान रहेंगे। इसका विरोध करने हजारों की संख्या में आसपास के गांवों से ग्रामीण पहुंचे हुए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि कैम्प खुलने के बाद जवान ग्रामीणों को परेशान करेगें। अधिकारियों ने पहले तो ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं माने तो जवानों ने पहले ग्रामीणों पर लाठियां भांजी और भीड़ को तीतर बितर किया। जब ग्रामीण नहीं माने तो जवानों हवाई फायरिंग भी की।
बता दें कि नक्सलवाद के चलते 2007 के बाद से ही अरहनपुर-पोटाली मार्ग बंद है। पोटाली और आसपास के गांव में रहने वाले ग्रामीणों को अभी अपनी हर छोटी बड़ी जरूरतों के लिए कई किलोमीटर पैदल चल कर अरहनपुर पहुंचना पड़ता है। इसके साथ ही यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित भी है और ग्रामीणों को उन्हीं के बीच रहना पड़ता है ग्रामीणों को डर है कि यदि पुलिस कैंप यहां बना तो न सिर्फ नक्सलियों से व प्रताड़ित होंगे बल्कि पुलिस वाले भी उनको आए दिन पूछताछ के लिए प्रताड़ित करेंगे।

