पिकनिक के दौरान नदी में डूबने से मौत, भारत माता स्कूल के थे बच्चे
रायपुर। स्कूल वाले बच्चों को पिकनिक घुमाने के नाम पर पानी वाली जगह पर ले जाते है और शिक्षकों की लापरवाही के चलते दो बच्चो की अचानक पानी में डूबकर मौत हो जाती हैं। यह मामला है बीते शनिवार का जहाँ राजधानी के टाटीबंध स्थित भारत माता स्कूल का जहाँ बच्चो से 850 रूपए का शुल्क लेकर उन्हें सिरपुर में गंधेश्वरनाथ मंदिर और महानदी घुमाने के लिए तीन बसों में सवार होकर 170 बच्चे पिकनिक पर ले गए थे। बच्चों की टोली महानदी में नहाने के लिए उतरी थी। बच्चों की टोली से हटकर तीन बच्चे नहाते हुए नदी के बीच गहरायी वाली सतह पर पहुँच गए थे। एक बच्चे को उसके भाई ने देखा और उसे खींचकर बाहर निकाल लिया था। लेकिन अन्य दो बच्चे खुशदीप सिंह और अमन शुक्ला अचानक से नहीं दिखे जिसके बाद शिक्षकों और बच्चो के बीच कोहराम मचने पर आसपास के ग्रामीण बचाने के लिए दौड़ पड़े। महानदी में बच्चों की तलाश प्रारंभ हुई और दस फ़ीट की गहरायी से बच्चो की शव को निकाला गया तब तक मासूमों ने दम तोड़ दिया था। इस घटना के बाद स्कूल प्रबंधन अपने बचाव करने के लिए बच्चों को कुछ बताने से मना कर दिया था। इतनी बड़ी घटना होने के बाद स्कूल प्रबंधन ने परिजनों के सवाल पर जवाब देने से मना कर दिया।
यह थी घटना, स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से गयी जान
भारत माता स्कूल से 170 बच्चे और स्कूल के शिक्षक सिरपुर पहुंचे थे। जहां गंधेश्वरनाथ मंदिर और महानदी घुमाने के लिए पिकनिक स्पॉट रखा गया था। पिकनिक स्पॉट पर पहुँचते ही बच्चो को महानदी तट पर नहाने के लिए शिक्षकों द्वारा भेजा गया था।वही दो बच्चे खुशदीप सिंह और अमन शुक्ल दोनों 9वी कक्षा में पढ़ते थे और दोनों दोस्त भी थे।
नदी में नहाते वक्त भीड़ से हटकर नदी के बीच दस फ़ीट गहरायी तक जा पहुंचे थे, जिसके बाद शिक्षकों ने पास के रहवासियो को मदद के लिए बुलाया और पास में सिरपुर चौकी में भी घटना की जानकारी दी। जानकारी मिलते ही पिकनिक स्पॉट में कोहराम मच गया था। पुलिस जवान तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर महानदी में प्रवेश कर करीब 9-10 फीट गहरे पानी से दोनों बच्चों को बाहर निकाला तब बच्चो की साँसे नहीं चल रही थी।
वही डायल 112 की मदद से तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव पहुंचाया गया। जहां चिकित्सकों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया।
निजी स्कूल कर रहे मनमानी, बच्चों की जान से कर रहे खिलवाड़
जिलाधीश की उक्त बातो से ऐसा लगा कि इन मासूम जान की कीमत आर्थिक सहयता से पूरी हो सकती है और परिजन के कंसर्न पर भेजने पर पिकनिक स्पॉट पर जवाबदारी शिक्षकों की नहीं परिजनों की होती है.इतना ही नहीं उनसे अन्य स्कूल पर क्या कड़ाई से नियम लागू किये जायेंगे सवाल पूछा गया तो उन्होंने गोल मोल जवाब देते हुए कहा कि , आगामी बैठक हुई तब इस सिस्टम के बारे में सोचा जायेगा। बता दे कि जिले में महीनेभर पहले ही रेडियंट वे पब्लिक स्कूल की एक बच्ची भी एडवेंचर स्पोर्ट्स के चलते गिरी थी अब भी बच्ची की हालत गंभीर है। लेकिन शिक्षा विभाग और प्रशासन अब भी इस पर सख्ती नहीं बरते है जिसकी वजह से निजी स्कूल अपनी मनमानी कर रहे है और खामियाज़ा बच्चो की जान को खतरे में डालकर लिया जा रहा है।
स्कूल की लापरवाही ले डूबी बच्चों की जान
पिकनिक से आने के बाद बच्चो ने परिजनों को बताया की वहां उन्हें पानी में उतार दिया था और उनसे पूछा भी नहीं गया की तैराकी आती है या नहीं। इतना ही नहीं बच्चो ने बताया कि पिकनिक स्पॉट पर जानकारी नहीं दिया गया था की नदी कितना गहरा है और कहा तक उन्हें उतरना है। परिजनों ने बताया की ,पानी में बच्चे ही उतरे थे न उनके साथ कोई शिक्षक उतरे न ही कोई गोताखोर जो बच्चो को पानी में देख सके। स्कूल की लापरवाही के चलते बच्चो की जान चले गयी।
सीएम ने तत्काल दी आर्थिक सहायता : घटना की सूचना के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बच्चों के परिवार वालो को तुरंत आर्थिक सहयता के तौर पर चार -चार लाख रूपए देने की घोषणा की।
घटना पर जिलाधीश के बयान से झलकी असंवेदनशीलता : बीते शनिवार को पिकनिक स्पॉट पर दो बच्चो की मौत होजाने पर दोपहर के बाद जहाँ जिले में दु:ख छाया हुआ है, तो वही राजधानी रायपुर के कलेक्टर डॉ एस.भारतीदासन ने इस घटना पर जनता से रिश्ता संवादाता को बतया कि सीएम ने उन बच्चो के परिजनों को तुरंत आर्थिक सहयता पहुंचाते हुए चार-चार लाख रूपए देने की घोषणा कर दी है। मैंने जिला शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट देने बोला है। जब तक पीएम रिपोर्ट नहीं आजाती कुछ कहना मुश्किल है। यदि स्कूल की लापरवाही हुई होगी तो उन पर एफआईआर दर्ज किया जायेगा। वैसे भी इन बच्चों को परिजनों के परमिशन से ही पिकनिक पर भेजा गया था।
रायपुर। स्कूल वाले बच्चों को पिकनिक घुमाने के नाम पर पानी वाली जगह पर ले जाते है और शिक्षकों की लापरवाही के चलते दो बच्चो की अचानक पानी में डूबकर मौत हो जाती हैं। यह मामला है बीते शनिवार का जहाँ राजधानी के टाटीबंध स्थित भारत माता स्कूल का जहाँ बच्चो से 850 रूपए का शुल्क लेकर उन्हें सिरपुर में गंधेश्वरनाथ मंदिर और महानदी घुमाने के लिए तीन बसों में सवार होकर 170 बच्चे पिकनिक पर ले गए थे। बच्चों की टोली महानदी में नहाने के लिए उतरी थी। बच्चों की टोली से हटकर तीन बच्चे नहाते हुए नदी के बीच गहरायी वाली सतह पर पहुँच गए थे। एक बच्चे को उसके भाई ने देखा और उसे खींचकर बाहर निकाल लिया था। लेकिन अन्य दो बच्चे खुशदीप सिंह और अमन शुक्ला अचानक से नहीं दिखे जिसके बाद शिक्षकों और बच्चो के बीच कोहराम मचने पर आसपास के ग्रामीण बचाने के लिए दौड़ पड़े। महानदी में बच्चों की तलाश प्रारंभ हुई और दस फ़ीट की गहरायी से बच्चो की शव को निकाला गया तब तक मासूमों ने दम तोड़ दिया था। इस घटना के बाद स्कूल प्रबंधन अपने बचाव करने के लिए बच्चों को कुछ बताने से मना कर दिया था। इतनी बड़ी घटना होने के बाद स्कूल प्रबंधन ने परिजनों के सवाल पर जवाब देने से मना कर दिया।
यह थी घटना, स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से गयी जान
भारत माता स्कूल से 170 बच्चे और स्कूल के शिक्षक सिरपुर पहुंचे थे। जहां गंधेश्वरनाथ मंदिर और महानदी घुमाने के लिए पिकनिक स्पॉट रखा गया था। पिकनिक स्पॉट पर पहुँचते ही बच्चो को महानदी तट पर नहाने के लिए शिक्षकों द्वारा भेजा गया था।वही दो बच्चे खुशदीप सिंह और अमन शुक्ल दोनों 9वी कक्षा में पढ़ते थे और दोनों दोस्त भी थे।
नदी में नहाते वक्त भीड़ से हटकर नदी के बीच दस फ़ीट गहरायी तक जा पहुंचे थे, जिसके बाद शिक्षकों ने पास के रहवासियो को मदद के लिए बुलाया और पास में सिरपुर चौकी में भी घटना की जानकारी दी। जानकारी मिलते ही पिकनिक स्पॉट में कोहराम मच गया था। पुलिस जवान तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर महानदी में प्रवेश कर करीब 9-10 फीट गहरे पानी से दोनों बच्चों को बाहर निकाला तब बच्चो की साँसे नहीं चल रही थी।
वही डायल 112 की मदद से तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव पहुंचाया गया। जहां चिकित्सकों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया।
निजी स्कूल कर रहे मनमानी, बच्चों की जान से कर रहे खिलवाड़
जिलाधीश की उक्त बातो से ऐसा लगा कि इन मासूम जान की कीमत आर्थिक सहयता से पूरी हो सकती है और परिजन के कंसर्न पर भेजने पर पिकनिक स्पॉट पर जवाबदारी शिक्षकों की नहीं परिजनों की होती है.इतना ही नहीं उनसे अन्य स्कूल पर क्या कड़ाई से नियम लागू किये जायेंगे सवाल पूछा गया तो उन्होंने गोल मोल जवाब देते हुए कहा कि , आगामी बैठक हुई तब इस सिस्टम के बारे में सोचा जायेगा। बता दे कि जिले में महीनेभर पहले ही रेडियंट वे पब्लिक स्कूल की एक बच्ची भी एडवेंचर स्पोर्ट्स के चलते गिरी थी अब भी बच्ची की हालत गंभीर है। लेकिन शिक्षा विभाग और प्रशासन अब भी इस पर सख्ती नहीं बरते है जिसकी वजह से निजी स्कूल अपनी मनमानी कर रहे है और खामियाज़ा बच्चो की जान को खतरे में डालकर लिया जा रहा है।
स्कूल की लापरवाही ले डूबी बच्चों की जान
पिकनिक से आने के बाद बच्चो ने परिजनों को बताया की वहां उन्हें पानी में उतार दिया था और उनसे पूछा भी नहीं गया की तैराकी आती है या नहीं। इतना ही नहीं बच्चो ने बताया कि पिकनिक स्पॉट पर जानकारी नहीं दिया गया था की नदी कितना गहरा है और कहा तक उन्हें उतरना है। परिजनों ने बताया की ,पानी में बच्चे ही उतरे थे न उनके साथ कोई शिक्षक उतरे न ही कोई गोताखोर जो बच्चो को पानी में देख सके। स्कूल की लापरवाही के चलते बच्चो की जान चले गयी।
सीएम ने तत्काल दी आर्थिक सहायता : घटना की सूचना के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बच्चों के परिवार वालो को तुरंत आर्थिक सहयता के तौर पर चार -चार लाख रूपए देने की घोषणा की।
घटना पर जिलाधीश के बयान से झलकी असंवेदनशीलता : बीते शनिवार को पिकनिक स्पॉट पर दो बच्चो की मौत होजाने पर दोपहर के बाद जहाँ जिले में दु:ख छाया हुआ है, तो वही राजधानी रायपुर के कलेक्टर डॉ एस.भारतीदासन ने इस घटना पर जनता से रिश्ता संवादाता को बतया कि सीएम ने उन बच्चो के परिजनों को तुरंत आर्थिक सहयता पहुंचाते हुए चार-चार लाख रूपए देने की घोषणा कर दी है। मैंने जिला शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट देने बोला है। जब तक पीएम रिपोर्ट नहीं आजाती कुछ कहना मुश्किल है। यदि स्कूल की लापरवाही हुई होगी तो उन पर एफआईआर दर्ज किया जायेगा। वैसे भी इन बच्चों को परिजनों के परमिशन से ही पिकनिक पर भेजा गया था।


