पामगढ़@देवेन्द्र यादव- भारत सरकार ग्रामीण विकास मंत्रालय नई दिल्ली ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत परिसंपत्तियों की जियो टैग श्रेणी में उत्कृष्ट कार्य करने पर जिले के विकासखण्ड पामगढ़ को पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की है। इस उपलब्धि पर महात्मा गांधी नरेगा जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं कलेक्टर जनक प्रसाद पाठक ने कहा कि उत्कृष्ट पुरस्कार मिलने से देश में जिले का मान बढ़ा है। इस उपलब्धि पर कलेक्टर पाठक और जिपं पंचायत सीईओ मनरेगा अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक तीर्थराज अग्रवाल ने मनरेगा जिला एवं जनपद पंचायत पामगढ़ टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।
सीईओ अग्रवाल ने बताया कि राज्य कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार मनरेगा के क्रियान्वयन में दिए जाने वाले उत्कृष्ट पुरस्कार में छत्तीसगढ़ को विभिन्ना श्रेणी में 7 पुरस्कार मिले हैं। जिसमें जिले को महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत जीआईएस असेट सुपर विजिन (जीएएस) इम्पलीमेंटेशन ऑफ जीईओ मनरेगा इनिशिएटिव यानी जियो टैग के क्षेत्र में जिले के विकासखण्ड पामगढ़ को देश में दूसरा पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। उन्होंने बताया यह पुरस्कार परिसंपत्तियों के निर्माण के दौरान तीन चरणों में जियो टैगिंग में बेहतर क्रियान्वयन करने पर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जियो टैगिंग में कलेक्टर जनक प्रसाद पाठक का लगातार मार्गदर्शन मिलता रहा है। उनके द्वारा इस संबंध में समीक्षा बैठक लेकर मानीटरिंग करने से ही यह उत्कृष्ट परिणाम मिला है। इसमें जिपं पंचायत स्तर से सहायक परियोजना अधिकारी विजयेन्द्र सिंह, प्रोग्रामर गौरव शुक्ला ने जियो टैगिंग को लेकर लगातार संबंधित जनपद पंचायत को जानकारी दी। साथ ही सहायक प्रचार-प्रसार अधिकारी देवेन्द्र यादव द्वारा इस दिशा में लगातार प्रचार-प्रसार किया गया। जनपद पंचायत स्तर पर सीईओ डीएस यादव एवं मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी सौरभ शुक्ला का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने सहायक प्रोग्रामर विवेक अग्रवाल एवं समस्त तकनीकी सहायक, रोजगार सहायक को जियो टैगिंग करने के लिए निर्देश दिए और निर्माण कार्यों के द्वारा स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया। जिसका परिणाम ही पुरस्कार के रूप में मिला है, राष्ट्रीय स्तर पर मिले सम्मान से जिला गौरान्वित है।
परिसंपत्तियों का जियो टैगिंग
जिपं सीईओ अग्रवाल ने बताया कि महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत परिसंपत्तियों की भौगोलिक स्थिति जानने के लिए जियो टैगिंग की जाती है। इसके लिए जियो ऐप सभी तकनीकी सहायक, रोजगार सहायक के मोबाइल में डाउनलोड रहता है। संबंधित व्यक्ति परिसंपत्ति स्थल पर जाकर तीन चरणों में जियो टैग करता है। पहले चरण में परिसंपत्ति के निर्माण कार्य शुरू होने पर फोटो ली जाती है, उसके बाद परिसम्पत्ति निर्माण कार्य के बीच में और अंतिम फोटो निर्माण कार्य के पूर्ण होने पर ली जाती है। यह फोटो संबंधित निर्माण स्थल के 20 मीटर के दायरे में रहते हुए खींची जाती है, उसके बाद उसे जियो ऐप के माध्यम से ऑनलाइन टैग किया जाता है।
सीईओ अग्रवाल ने बताया कि राज्य कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार मनरेगा के क्रियान्वयन में दिए जाने वाले उत्कृष्ट पुरस्कार में छत्तीसगढ़ को विभिन्ना श्रेणी में 7 पुरस्कार मिले हैं। जिसमें जिले को महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत जीआईएस असेट सुपर विजिन (जीएएस) इम्पलीमेंटेशन ऑफ जीईओ मनरेगा इनिशिएटिव यानी जियो टैग के क्षेत्र में जिले के विकासखण्ड पामगढ़ को देश में दूसरा पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। उन्होंने बताया यह पुरस्कार परिसंपत्तियों के निर्माण के दौरान तीन चरणों में जियो टैगिंग में बेहतर क्रियान्वयन करने पर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जियो टैगिंग में कलेक्टर जनक प्रसाद पाठक का लगातार मार्गदर्शन मिलता रहा है। उनके द्वारा इस संबंध में समीक्षा बैठक लेकर मानीटरिंग करने से ही यह उत्कृष्ट परिणाम मिला है। इसमें जिपं पंचायत स्तर से सहायक परियोजना अधिकारी विजयेन्द्र सिंह, प्रोग्रामर गौरव शुक्ला ने जियो टैगिंग को लेकर लगातार संबंधित जनपद पंचायत को जानकारी दी। साथ ही सहायक प्रचार-प्रसार अधिकारी देवेन्द्र यादव द्वारा इस दिशा में लगातार प्रचार-प्रसार किया गया। जनपद पंचायत स्तर पर सीईओ डीएस यादव एवं मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी सौरभ शुक्ला का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने सहायक प्रोग्रामर विवेक अग्रवाल एवं समस्त तकनीकी सहायक, रोजगार सहायक को जियो टैगिंग करने के लिए निर्देश दिए और निर्माण कार्यों के द्वारा स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया। जिसका परिणाम ही पुरस्कार के रूप में मिला है, राष्ट्रीय स्तर पर मिले सम्मान से जिला गौरान्वित है।
परिसंपत्तियों का जियो टैगिंग
जिपं सीईओ अग्रवाल ने बताया कि महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत परिसंपत्तियों की भौगोलिक स्थिति जानने के लिए जियो टैगिंग की जाती है। इसके लिए जियो ऐप सभी तकनीकी सहायक, रोजगार सहायक के मोबाइल में डाउनलोड रहता है। संबंधित व्यक्ति परिसंपत्ति स्थल पर जाकर तीन चरणों में जियो टैग करता है। पहले चरण में परिसंपत्ति के निर्माण कार्य शुरू होने पर फोटो ली जाती है, उसके बाद परिसम्पत्ति निर्माण कार्य के बीच में और अंतिम फोटो निर्माण कार्य के पूर्ण होने पर ली जाती है। यह फोटो संबंधित निर्माण स्थल के 20 मीटर के दायरे में रहते हुए खींची जाती है, उसके बाद उसे जियो ऐप के माध्यम से ऑनलाइन टैग किया जाता है।


