#न्यूज़ सर्च@रायपुर:- मोटिवेशनल स्पीच कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके ने अपनी सफलता की कहानी बयां की। उन्होंने बताया कि वह ऐसे ग्रामीण परिवेश थीं, जहां लड़कियों की शादी कम उम्र में ही कर दी जाती थी। उनकी छह बहनों के साथ भी ऐसा हुआ।
उनके गांव में 8वीं तक स्कूल था। वहां पढ़ाई के दौरान वह 7वीं में फेल हो गईं, लेकिन उस असफलता के बाद उन्होंने संकल्प लिया कि वह अब पीछे मुड़कर नहीं देखेंगी। इसके बाद उन्होंने 8वीं मैरिट से पास किया और गांव से पहली ऐसी लड़की थी जो पढ़ाई करने शहर गईं। वहां कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उन्होंने छात्रसंघ के उपाध्यक्ष का चुनाव लड़ा और हार गईं। राजनीति के लिए पैसे नहीं थे तो रिन का डोर-टू डोर प्रचार किया। एमए अर्थशा से करने के बाद एक कॉलेज में बतौर लेक्चरर जॉब किया और उसी दौरान विधानसभा का चुनाव लड़कर सबसे कम उम्र की महिला विधायक बनीं। इसके बाद भाजपा नेता सुषमा के मार्गदर्शन में राजनीति कर वाजपेयी सरकार में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य बनकर काफी काम किया। इसी मेहनत की बदौलत आज वह यहां तक पहुंची हैं। इस दौरान उन्होंने सचिवालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया कि किस तरह लोगों को अपना काम कराने के लिए वहां के चक्कर काटने पड़ते हैं, उन्हें भी नौकरी पाने के लिए इस अव्यवस्था से गुजरना पड़ा था।
उनके गांव में 8वीं तक स्कूल था। वहां पढ़ाई के दौरान वह 7वीं में फेल हो गईं, लेकिन उस असफलता के बाद उन्होंने संकल्प लिया कि वह अब पीछे मुड़कर नहीं देखेंगी। इसके बाद उन्होंने 8वीं मैरिट से पास किया और गांव से पहली ऐसी लड़की थी जो पढ़ाई करने शहर गईं। वहां कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उन्होंने छात्रसंघ के उपाध्यक्ष का चुनाव लड़ा और हार गईं। राजनीति के लिए पैसे नहीं थे तो रिन का डोर-टू डोर प्रचार किया। एमए अर्थशा से करने के बाद एक कॉलेज में बतौर लेक्चरर जॉब किया और उसी दौरान विधानसभा का चुनाव लड़कर सबसे कम उम्र की महिला विधायक बनीं। इसके बाद भाजपा नेता सुषमा के मार्गदर्शन में राजनीति कर वाजपेयी सरकार में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य बनकर काफी काम किया। इसी मेहनत की बदौलत आज वह यहां तक पहुंची हैं। इस दौरान उन्होंने सचिवालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया कि किस तरह लोगों को अपना काम कराने के लिए वहां के चक्कर काटने पड़ते हैं, उन्हें भी नौकरी पाने के लिए इस अव्यवस्था से गुजरना पड़ा था।


