यूपीएससी क्लीयर करने के बाद भी कुछ लोग बंद कमरे में तय करते हैं किसे नौकरी देनी किसे नहीं : इरा सिंघल
#News search@रायपुर:- रोलबोल की तरफ से आयोजित मोटिवेशनल स्पीच कार्यक्रम में रविवार को 2014 बैच की यूपीएससी टॉपर आईएएस ईरा सिंघल अपनी सफलता की कहानी बताई। उन्होंने देश की सबसे बड़ी सेवा के गलत नियम कायदों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया के टॉप थ्री सबसे मुश्किल एग्जाम में से एक यूपीएससी क्लीयर कर लेने के बाद भी उम्मीदवार के भाग्य का फैसला बंद कमरे में बैठकर कुछ लोग कर देते हैं। वह अपनी पसंद ना पसंद के आधार पर यह तय करते हैं कि किसे नौकरी देनी है किसे नहीं। इसी गलत नियम के चलते तीन बार यूपीएससी एग्जाम क्लीयर करने के बाद भी वह नौकरी नहीं पा सकीं।ईरा ने बताया कि वह एक ऐसे परिवार से हैं जहां कोई भी आज तक सरकारी नौकरी में नहीं गया। डॉक्टर बनने का सपना था तो पिता ने कहा तुमसे बड़ा मरीज और कोई है नहीं है। पिता की मर्जी पर इंजीनियरिंग की, लेकिन यह फील्ड रास नहीं आई तो एमबीए करके कैडबरी में जॉब कर लिया। यहां पैसा, जल्गजरी लाइफ सब मिला, लेकिन इतनी मेहनत करके भी दूसरों का भला नहीं पा रहीं थी। इसलिए यूपीएससी की तैयारी करने जॉब से रिजाइन दे दिया। पहले, दूसरे और तीसरे अटेंप्ट क्लीयर कर आईआरएस के लिए चयनित हुईं, लेकिन जिस प्रकार की उनकी डिसएबिलिटी थी उसके मुताबिक उन्हें कमीशन ने यह कह दिया कि उन्हें सिर्फ आईएएस की जॉब ही दी जा सकती है। इस नियम के खिलाफ वह कोर्ट भी गईं और उन्हें न्याय भी मिला, लेकिन तब तक चौथे अटेंप्ट में उन्होंने आईएएस क्लीयर कर लिया और आज दिल्ली में डिप्टी कमिश्नर के पद पर काम करके लोगों की भलाई के लिए काम कर रही हैं।


