कृषि वैज्ञानिकों ने बनाया लोहे का हल, मझोले बैल भी आसानी से कर पाएंगे जुताई - NEWSSEARCH

(पूरी हकीकत)

BREAKING NEWS

''कलेक्टर ने किया श्रमजीवी पत्रकार संघ के कैलेंडर का विमोचन''

कृषि वैज्ञानिकों ने बनाया लोहे का हल, मझोले बैल भी आसानी से कर पाएंगे जुताई

24 सौ रुपए तैयार यह हल है लकड़ी के हल से अधिक टिकाऊ और हल्का

लकड़ी की बचत के साथ रोजाना सुधारने के झंझट से किसानों को देता है निजात

न्यूज़ सर्च@रायपुर:- इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए जहां आधुनिक कृषि यंत्रों का अविष्कार किया है तो वहीं परंपरागत कृषि यंत्रों से भी जोडऩे का काम किया है। यह तथ्य वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया लोहे का तेंदुआ हल सही साबित करता है। कृषि वैज्ञानिकों ने लोहे की मदद से एक ऐसा हल तैयार किया जो कि काफी कम लागत में तैयार होने के साथ ही लकड़ी के विशालकाय हल से काफी हल्का और कृषि कार्य करने में आसान है। 
विश्वविद्यालय के कृषि यंत्र एवं शक्ति अभियांत्रिकी विभाग के वैज्ञानिकों ने मात्र 2400 रुपए की लागत से एक लोहे का तेंदुआ हल तैयार किया गया है। यह हल भले ही लकड़ी के हल से आकार में काफी छोटा हो, लेकिन काम में उससे कहीं अधिक सरल है। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो इस पशु चलित हल का उपयोग खेतों की प्रारंभिक जुताई के लिए किया जाता है। इसके साथ ही इसकी मदद से मिट्टी में भुरभुरापन लाने के साथ-साथ खेत में उगी खरपतवार को नष्ट कर मिट्टी के नीचे दबाने का काम करता है।

हल की कार्यदक्षता

1- मिट्टी के कटाव की औसत चौड़ाई    -    112 मि.मी.
2- मिट्टी के कटाव की औसत गहराई    -    80.80 मि.मी.
3- तेंदुआ हल की कार्यक्षमता           -     0.015 हेक्टेयर प्रति घंटा
4- तेंदुआ हल की निंदाई क्षमता        -     70.45 प्रतिशत
5- कीमत                                -     2400 रुपए प्रति हल

यह हैं विशेषताएं

1- यह लकड़ी के बने हल की तुलना में अधिक टिकाऊ है और लोहे से बने होने के चलते लकड़ी की बचत भी करता है।
2- इस हल की फाल घिसने पर इसे आसानी से बदला भी जा सकता है।
3- वजन में काफी हल्का होने के चलते छोटे एवं मझोले बैल इसे आसानी से खींच सकते हैं।
4- आवश्यकता पडऩे पर गांव के लोहार द्वारा इसे सुधरवाया जा सकता है।
5- कृषि वैज्ञानिकों ने इस यंत्र को छत्तीसगढ़ के पशुओं की कार्यक्षमता के आधार पर विकसित किया है।

Pages