यमराज की तरह दौड़ रहे धान से लदे ट्रक, लोगों की मौत के बाद भी नींद से नही जागा प्रशासन - NEWSSEARCH

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यमराज की तरह दौड़ रहे धान से लदे ट्रक, लोगों की मौत के बाद भी नींद से नही जागा प्रशासन

यमराज की तरह दौड़ रहे धान से लदे ट्रक, लोगों की मौत के बाद भी नींद से नही जागा प्रशासन  
खरीदी केंद्रों से संग्रहण केंद्र ले जाए जा रहे धान, ओवरलोड ट्रक से जानमाल का खतरा

न्यूज सर्च@जांजगीर-चांपा। धान से लदे ट्रक इन दिनों सड़कों में यमराज की तरह दौड़ रहे हैं। इन पर पुलिस की नजर पड़ती तो है, लेकिन सरकारी  है कहकर चलता कर दिया जाता है। ऐसे ओवरलोड वाहनों से हमेशा खतरा बना रहता है। इसी तरह की घटना में पिछले साल दो लोगों की जान भी जा चुकी है।
मार्कफेड अब धान की खरीदी कर चुकी है। अब खरीदी बंद भी हो चुकी है। ये धान खरीदी केंद्रों से राइसमिल और संग्रहण केंद्र पहुंचाए जा रहे हैं। ट्रांसपोर्टर नियम कानून की परवाह किए बगैर ट्रकों में क्षमता से अधिक धान भर कर ले जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार 10 चक्का वाले ट्रक में 17 टन, वहीं 12 चक्का वाले ट्रक में 21 टन माल परिवहन करने का नियम है। लेकिन ट्रांसपोर्टरों द्वारा पुलिस एवं यातायात विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत कर प्रत्येक ट्रकों में 7 से 10 टन अधिक माल भर कर धान का परिवहन किया जा रहा है। इन ट्रकों में ओवरलोड माल भरे होने की जानकारी पुलिस को होती है, लेकिन वे भी सरकारी धान है कहकर इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। उठाव की रफ्तार पहले धीमी थी, तब ऐसा नजारा कम देखने को मिलता था। लेकिन जब से खरीदी केंद्रों में धान की आवक बढ़ी और उठाव के लिए ट्रांसपोर्टरों पर दबाव बनाया गया, तब से ट्रांसपोर्टर ट्रकों में ओवरलोड धान भरकर परिवहन कर रहे हैं। धान का परिवहन मार्कफेड द्वारा तीन दिन के अंदर कराने का नियम है। इसलिए ट्रकों में ओवरलोड धान भर कर परिवहन किया जा रहा है। इन ट्रकों की रफ्तार इतनी तेज होती है कि ट्रक के उपर बैठे हमाल और सड़कों में चल रहे लोगों की जान हमेशा खतरे में रहती है। इसी तरह की घटना में पिछले साल दो हमालों की जान जा चुकी है। नगरदा में ट्रक के केबिन के उपर बैठा एक हमाल बिजली करंट की चपेट में आ गया था। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं सक्ती में धान अनलोड करते समय एक हमाल की धान के बोरे में दबकर मौत हो गई थी। 
सड़कों की बिगड़ी हालत
ओवरलोड धान से भरे ट्रक इन दिनों इस कदर फर्राटे मार रहे हैं कि सड़कों की हालत बदतर होती जा रही है। एनएच सड़कों की हालत तो खराब हो ही रही है। वहीं गांव-गांव से धान का उठाव होने से ग्रामीण क्षेत्र के सड़कों की हालत भी ठीक नहीं है। पीएमजीएसवाय की सड़कें पहले से ही कम मोटाई की बनी होती है। ऐसे में भारी वाहन गुजरते ही सड़क के परखच्चे उड़ रहे हैं।

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