अधिकारी की लापरवाही इस कदर की रीसैंपलिंग भी करा डाला
News search@bilaspur:- बिलासपुर में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही इस कदर बढ़ी है कि जिले में अब तक 21 लाख 64 हजार 75० रुपए के 1237 कोरोना संदेहियों का सैंपल रिजेक्ट यानी खराब हो चुके हैं। विभाग ने आनन-फानन में ज्यादातर सैंपलों की री-सैपलिग भी करवा ली है। पहले ही शासन के 21 लाख 64 हजार 75० रुपए बर्बाद करने वाले अधिकारियों ने अपनी गलती पर विचार किए बिना ही आनन फानन में सभी की री-सैंपलिग भी करा डाली, जिससे उसमें भी उतने ही रुपए खर्च हो गए हैं।इस मामले में सीएमएचओं डॉ. प्रमोद महाजन का कहना है कि संक्रमण में खर्च नहीं देखना है बल्कि काम होना चाहिए ये देखना है। शुक्रवार को खराब हुआ एक संदेही का सैंपल भी 1237 में शामिल है। कोरोना काल में जिले में अब तक 10843 सैंपल लिए गए हैं। इनमें 9152 की रिपोर्ट रायपुर एम्स से निगेटिव आई है तो वहीं 170 की पॉजिटिव है। वहीं 1237 सैंपलों को मशीन ने तुरंत रिजेक्ट कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बताया कि एक सैंपल लेने में 1750 रुपए का खर्च आता है। इस हिसाब से 1237 सैंपल पर शासन के 21 लाख 64 हजार 750 रुपए खर्च हुए हैं। ये राशि बिलासपुर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण बर्बाद हुई है। शुक्रवार को भी जो सैंपल रिजेक्ट हुआ है उसकी कोरोना रिपोर्ट अभी आना बाकी है। वहीं 1521 कोरोना संदेहियों के सैंपल की रिपोर्ट अभी भी रायपुर एम्स में ही अटकी हुई है।
सैंपल रिजेक्ट होने के तीन कारण
एम्स और मेडिकल कॉलेज रायपुर लैब के एक्सपर्ट डॉक्टरों से सैंपल रिजेक्ट होने का कारण पूछा गया तो उन्होंने इसके तीन मुख्य कारण बताए। पहला कारण बताया कि सैंपल ठीक से नहीं लिया गया होगा। दूसरा दूर से लाते समय तापमान मेंटेन नहीं होने से भी रिजेक्ट हो जाते हैंं। ज्यादातर सैंपल ठीक से नहीं लेने के कारण रिजेक्ट हुए हैं। क्योंकि मशीन उन्हें तुरंत रिजेक्ट कर देती है। गर्मी बढ़ने के कारण भी ऐसा हो रहा है। या लापरवाही पूर्वक सैंपल से इस तरह के मामले सामने आते है।20 से 24 मई के बीच के सैंपल ही रिजेक्ट हुए
बड़ी तादात में सैंपल रिजेक्ट होने का कारण पूछा गया तो स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बताया कि रायपुर में लेट से इंवेस्टिगेशन होने के कारण सैंपल रिजेक्ट हुए हैं। अधिक तापमान में भी रिजेक्ट होना कारण है। हालांकि अफसरों ने कहा कि पिछले कई दिनों से हमारे सैंपल रिजेक्ट नहीं हुए हैं। 20 से 24 मई के बीच में ज्यादातर सैंपल रिजेक्ट हुए थे। अभी सभी सैंपलों की रिपोर्ट आ रही है।एम्स ने 103 सैंंपल भेजने का दिया टारगेट
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में एम्स ने प्रतिदिन 103 सेंपल ही जांच के लिए भेजने का टारगेट दिया है। जिसको सभी ब्लॉक के संदेहियों को मिलाकर देना है। वहीं इससे पहले सैंपल 500 से 700 तक जा रहे थे, लेकिन इस समय हर दिन 70 से 103 सैंपल भेजे जा रहे हैं। अब रिपोर्ट भी बराबर आ रही है। जो सैंपल रिजेक्ट हुए थे, उनकी रि-सैंपलिग करा ली गई है।5 मार्च को लिया था पहला सैंपल
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कोरोना काल में जिले का पहला सैंपल 5 मार्च को लिया गया था। इसी दिन से सैंपल लेने का सिलसीला शुरु हुआ था। इसके बाद दूसरा सैंपल 23 मार्च को लिया था। 27 मार्च को तीसरा और 30 मार्च को चौथा सैंपल लिया गया था। इसमें 23 मार्च को सकरी क्षेत्र निवासी एक महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जो जिले की पहली कोरोना मरीज थी। 2 अप्रैल को यह महिला पूरी तरह ठीक हो गई थी। यह जिले की पहली उपलब्धि भी थी। यानी पहली कोरोना मरीज 23 मार्च को मिली और 2 अप्रैल को स्वस्थ हो गई। इसके बाद सैंपलिग जारी रही और अब तक 10843 सैंपल लिए गए। वहीं 1521 की रिपोर्ट अभी भी आना बाकी है।जानिए, कहां कितने रुपए हो रहे खर्च
- पीपीई किट, ग्लब्स, चश्मा और मास्क : 600 रुपए- कर्मचारी जो सैंपल लेता है : 600 रुपए
- वीटीएम और स्वाब : 350 रुपए
- आइसपेड : 100 रुपए
- एम्स तक गाड़ी से जाने पर : 100रुपए
- एक सेंपल लेने में कुल 1750 रुपए खर्च


