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मल्लाह ने आटे के दीये प्रवाहित कर मां मंदाकिनी को स्वच्छ बनाने जगायी अनोखी अलख

न्यूज सर्च@चित्रकूट- जहां एक तरफ केंद्र से लेकर राज्य सरकारें स्वाच्छता अभियान चलाकर नदी से लेकर क्षेत्र को स्वच्छ बनाने के प्रयास कर रही हैं वहीं चित्रकूट में एक नाविक ने मां मंदाकिनी को स्वच्छ करने की अलख जगाई है। मंदाकिनी नदी को स्वच्छ करने की उसकी यह अनोखी मुहिम क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।     

चित्रकूट में मंदाकनी नदी में नौका चलाकर अपना जीवन यापन करने वाला गरीब मल्लाह जैसा काम कर रहा वह लोगों को काफी प्रेरणा दे रहा है। इस नेक कार्य को करने वाले महावीर निषाद का कहना है कि वह कई सालों से मंदाकिनी में नाव चलाकर लोगों को वहां सैर कराते आ रहे हैं। उनका कहना है कि लोग मंदाकिनी में मिट्टी व चमकीली पन्नी और दोने के दिए लाखों की संख्या में हर साल प्रवाहित करते हैं। इससे मां मंदाकिनी दूषित हो जा रही है। इससे उन्होंने एक तरीका अपनाया कि यदि इन दियों की जगह आटे के दिए बनाकर प्रवाहित किए जाएं तो उससे मंदाकिनी प्रदूषित भी नहीं होगी और नदी में रह रही मछलियों को भी भोजन मिल पाएगा। इसके लिए उन्होंने खुद ही गेंहू के आटे के दिए बनाकर घाट पर बेचना शुरू कर दिया।
महावीर का कहना है कि जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए और नदी में आटे के दिये के अलावा अन्य दिए के विसर्जन पर रोक लगानी चाहिए। यह मंदाकिनी को स्वच्छ रखने में एक बड़ा कदम हो सकता है। ऐसे यहां बिना प्रदूषण फैलाए ही दीपदान जैसा भव्य कार्य हो पाएगा।
रिपोर्ट- आशीष उपाध्याय

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