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हिंदुस्तान और एचएमटी जैसी 19 बड़ी सरकारी कंपनियां हो सकती हैं बंद

भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय ने घाटे में चलने की दी जानकारी संसद ने दी बंद करने की मंजूरी

न्यूज सर्च नई दिल्ली- आर्थिक मंदी से जूझ रहे भारत में कई निजी बड़ी कंपनियां बंद हो गई हैं और कई बंद होने के कगार पर हैं। इसी क्रम में संसद ने भी हिंदुस्तान और एचएमटी जैसी 19 बड़ी सरकारी कंपनियों को बंद करने की मंजूरी दे दी है। इन कंपनियों में कई लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है, जिनके सामने नौकरी का संकट गहरा सकता है। इसे लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना भी साधा है और भारत के भविष्य को अंधकार में जाता हुआ बताया है।
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गौरतलब है कि लोकसभा में कांग्रेस के सांसद एडवोकेट अदूर प्रकाश ने भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय से पब्लिक सेक्‍टर की कंपनियों का ब्‍यौरा मांगा था। ब्यौरे के बाद अदूर प्रकाश ने सवाल पूछा था कि क्‍या सरकार घाटे में चल रहे पीएसयू को बंद करने या उनके निजीकरण पर विचार कर रही है? उन्होंने दूसरा सवाल यह भी उठाया था कि क्‍या नीति आयोग ने निजीकरण के लिए पीएसयू की कोई सूची तैयार की है? इसके साथ ही प्रकाश ने निजीकरण के लिए प्रस्‍तावित सभी पीएसयू के मुनाफा या नुकसान का ब्‍यौरा भी मांगा था। इस पर भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय के मंत्री अरविंद गणपत सांवत ने अलग-अलग विभागों की घाटे में चल रही कंपनियों के बारे में जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि 19 पीएसयू कंपनियों की सूची भी दी, जिन्हें बंद करने की कवायद करने की जानकारी दी गई। मंत्रालय की ओर से बताया गया कि भारी उद्योग विभाग- तुंगभद्रा स्‍टील प्रोडक्‍ट्स लिमिटेड, एचएमटी वॉचेज लिमिटेड, एचएमटी चिनार वॉचेज लिमिटेड, एचएमटी बियरिंग्‍स लिमिटेड, हिंदुस्‍तान केबल्‍स लिमिटेड, एचएमटी लिमिटेड की ट्रैक्‍टर यूनिट और इंस्‍ट्रूमेंटेशन लिमिटेड की कोटा यूनिट को बंद करने की मंजूरी सरकार की ओर से दे दी गई है। साथ जहाजरानी मंत्रालय के अधीन आने वाले केंद्रीय अंतर्देशीय जल परिवहन निगम लिमिटेड को भी घाटे में चलना बताया गया। साथ यह भी जानकारी दी गई कि फार्मास्‍युटिकल्‍स विभाग के इंडियन ड्रग्‍स और राजस्‍थान ड्रग्‍स एंड फार्मास्‍युटिकल्‍स लिमिटेड को भी सरकार द्वारा बंद करने का प्रस्ताव दिया जा चुका है। सरकार जिन कंपनियों को बंद करने वाली है उनमें पेट्रोलियम, पर्यावरण, रेल मंत्रालय के अधीन आने वाली कई कंपनियां भी शामिल हैं। नौ कंपनियों की सूची खबर में देख सकते हैं।
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