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फार्मेसी की परीक्षा में व्यापम ने पूछे सिलेबस से बाहर के 80 प्रतिशत सवाल

रायपुर. छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) में रोज नए कारनामे सामने आ रहे हैं। यहां दो सगी बहनों का एक ही पद पर समान नंबरों के साथ चयन होने के मामले के बाद फार्मासिस्ट आयुर्वेद की परीक्षा को लेकर भी विरोध शुरू हो गया है। इस परीक्षा में शामिल दर्जनों उम्मीदवारों मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री सहित व्यापम से शिकायत की है। उनका आरोप है कि परीक्षा में पूछे गए 100 प्रश्नों में से 80 प्रश्न सिलेबस से बाहर के पूछे गए हैं, जो कि नियम के तहत गलत है। उम्मीदवारों का आरोप है कि ऐसा कृत्य अयोग्य लोगों का चयन करने को लेकर हुआ है।
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गौरतलब है कि 4 नवंबर 2019 को व्यापम ने फार्मास्स्टि आयुर्वेद की ऑन लाइन परीक्षा  online exam आयोजित कराई थी। भर्ती परीक्षा के नियम के अनुसार संबंधित विभाग द्वारा प्रदान किए जाने वाले सिलेबस के अनुसार ही परीक्षा आयोजित ली जाती है, लेकिन व्यापम ने नियमों का पालन नहीं किया। उनके द्वारा 80 प्रतिशत प्रश्न सिलेबस के बाहर से दिए गए। इससे परीक्षार्थी काफी परेशान हुआ और उनका पेपर बिगड़ गया। परीक्षार्थियों ने इस संबंध में व्यापम के संयुक्त नियंत्रक से शिकायत भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह परीक्षा online exam आयोजित करके परीक्षार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। संबंधि विभाग आयुष जो आपको परीक्षा online exam आयोजित करने की जिम्मेदारी दे रहा है उसके साथ भी व्यापम छल कर रहा है। इस तरह करके व्यापम अयोग्य उम्मीदवार का चयन करने का षडयंत्र कर रहा है। परीक्षार्थियों ने मांग की है कि उक्त परीक्षा online exam को निरस्त किया जाए और दोबारा से भर्ती परीक्षा सिलेबस के अनुसार ली जाए। यदि यह संभव नहीं है तो सिलेबस से बाहर के पूछे गए प्रश्नों के अंकों को विलोपित करके बोनस अंकों के साथ मूल्यांकन किया जाए।
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मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री से भी की शिकायत 

परीक्षार्थियों ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री भूपेष बघेल सहित स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और आयुष संचनालय सेभी शिकायत की है। शिकायतकर्ता हरेकृष्ण सिन्हा सहित मनोहर साहू, दीनानाथ, उर्वशी सिन्हा, रामेश्वर, ओंकार प्रसाद, अश्वनी कुमार, सुनीता सिदार, नीता सिदार, गोमती सिदार, टीकाराम सिदार और धनमती सिदार ने मांग की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए, क्योंकि युवा बेरोजगारों के भविष्य से खिलवाड़ करने मामला व्यापम में पहला नहीं है। इससे पहले भी कई मामले इस तरह के हो चुके हैं, जो कि संस्था की विश्वनियता पर भी सवाल खड़ा करता है।

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