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धड़ल्ले से हो रही शराब की और रेटिंग जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं कोई सरोकार

न्यूज़ सर्च@रायपुर:- राजधानी में इन दिनों शराब और शबाब का खेल जोरों पर है। एक तरफ नए साल में बड़े-बड़े होटलों में न्यू ईयर पार्टी के नाम पर जमकर शराब परोसी गई, तो वही वीरगांव, भनपुरी टाटीबंध, व्यास तालाब जैसे शहर के किनारों पर स्थित सरकारी शराब की दुकानों में जमकर ओवर रेटिंग हुई। ऐसा नहीं कि इसकी जानकारी आबकारी विभाग के अधिकारियों को नहीं है, लेकिन चल रहे कमीशन के खेल के चलते सभी अपनी आंखें मूंदे बैठे हैं।
न्यूज़ सर्च की टीम जब इस गोरखधंधे की जमीनी हकीकत जानने के लिए शहर के किनारे स्थित शराब की भर्तियों में पहुंची तो वहां जमकर और रेटिंग चल रही थी। इतना ही नहीं जिसको जितनी बोतल शराब चाहिए वह भी मिल जा रही थी। अंग्रेजी शराब दुकान वाले ने जहां 20 से ₹30 महंगे दाम पर नॉर्मल और उससे अधिक रेट पर ब्रांडेड शराब बेच रहे थे तो वहीं देसी में भी जमकर यही खेल चला था।  यहां चार बोतल से अधिक शराब के लिए लोगों से पैसा लिया जा रहा था। वीर गांव में जब शराब दुकान वाले से कहा गया कि वह वररेट पर शराब क्यों दे रहा है तो उसने कहा कि इस बात की जानकारी ऊपर अधिकारियों को भी है। स्टाक खत्म होने पर वह लोग शराब को अधिक रेट पर बेचते हैं जिससे कि माल बचा रहे हालांकि सेल्समेन का यह जवाब कहीं से भी गले नहीं उतर रहा है।

स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा रोजगार

 शराब दुकानों में जो स्टाफ रखा गया वह सब दूसरे राज्य के हैं।  नियम के मुताबिक कंसलटेंट कंपनी को स्थानीय लोगों को ही रोजगार दिया जाना है, लेकिन देखने में यह आ रहा है कि जो कंपनी वर्तमान में काम कर रहे उसके द्वारा यूपी बिहार और अन्य प्रांतों के लोगों को रोजगार दे रही है और छत्तीसगढ़ के निवासियों को नौकरी पर नहीं रख रही है। इससे खुलेआम शासन के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं।

इसी गलती के चलते बदली गई है एजेंसी

आबकारी विभाग ने स्थानीय लोगों को रोजगार न दिए जाने के चलते ही पुरानी कंसलटेंट कंपनी को हटाकर उसकी जगह ए टू जेड नाम की कंपनी को काम दिया था। वर्तमान में काम कर रही एटूजेड कंपनी भी खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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