तीन साल बाद भी केजा बाई के हाथ खाली मांग कर दो वक्त की रोटी खाने मजबूर, प्रशासनिक व्यवस्था की खुल रही पोल
वृद्धा पेंशन के लिए सालों का इंतजार, आखिर कब जुड़ेगा नाम...?
जनदर्शन से लोगों का मोह भंग, गरीब आज भी सुविधाओं को लेकर मोहताज
मनोज शर्मा
न्यूज सर्च@जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय में ही शासन की योजना का लाभ लेने लोगों को सालो का इंतजार करना पड़ता है। इसका उदाहरण केजा बाई के वृद्धा पेंशन में नाम जोड़ने के मामले को कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। सरकार द्वारा गरीबों की सुविधा के लिए विभिन्न प्रकार की योजना संचालित जा रही है, जिसके लिए करोड़ो रुपए पानी की तरह बहाए जाते हैं। इसके बावजूद गरीबों की इन योजनाओं पर पलीता लग रहा है। सरकारी कर्मचारी इनपर पानी फेरने कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इससे सुविधाओं का लाभ पाने गरीब जनता सरकारी कारिंदों के सामने असहाय नजर आती है।मुख्यालय के वार्ड 09 की निवासी केजा बाई यादव पति रामगोपाल 70 वर्ष की उम्र में लाठी के सहारे पेंशन की सूचि में नाम जुड़वाने के लिए तीन साल से प्रतीक्षा कर मांग कर अपना जीवन यापन कर रही है।
लाठी टेक गुहार लगाने गई थी कलेक्टोरेट
खाली पैर लाठी के सहारे कलेक्टर आफिस में वृद्धा ने कई मर्तबा पेंशन के लिए आवेदन जमा किया है। इसके बाद भी अब तक उसे लाभ नहीं मिला। इससे कर्मचारियों की लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना रवैया उजागर हो रहा है। पेंशन के लिए नाम जुड़वाने कार्यालय में कर्मचारियों को आवेदन दे चुकी है। जिसपर मौजूद कर्मचारी ने नाम जुड़ जाने का आश्वाशन दिया था। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब जिला मुख्यालय में निवासरत लोगों को योजनाओं का लाभ लेने इतनी मशक्कत करनी पड़ती है तो दूरदराज से आए ग्रामीणों का काम करने दफ्तर के कर्मचारी कितनी गंभीरता दिखाते होंगे।
मांग कर खाने मजबूर, व्यवस्था की खुल रही पोल
पेंशन की चाह लिए केजाबाई का जीवन यापन मांगकर होता है। ऐसे में प्रशासन की व्यवस्था पर कई तरह के प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। वृद्धा ने अपना नाम पेंशन की सूचि में जुड़वाने के लिए राशन कार्ड भी दिया। कार्यालय में उपस्थित कर्मचारी ने उसका आवेदन पत्र भरकर जमा करने की बात भी कही और घर तक सुविधा देने की बात कही और वह अपने घर जाकर उस दिन का इंतजार करने लगी के कब कर्मचारी आकर उसका पेंशन का खाता दे जिससे उसका आर्थिक तंगी कम हो जाए। लेकिन समय बीतने लगा पर उसका काम आगे नहीं बढ़ा और वह मांगकर ही अपना गुजारा कर रही है।
खाली पैर लाठी के सहारे कलेक्टर आफिस में वृद्धा ने कई मर्तबा पेंशन के लिए आवेदन जमा किया है। इसके बाद भी अब तक उसे लाभ नहीं मिला।
वृद्धा पेंशन के लिए सालों का इंतजार, आखिर कब जुड़ेगा नाम...?
जनदर्शन से लोगों का मोह भंग, गरीब आज भी सुविधाओं को लेकर मोहताज
मनोज शर्मा
न्यूज सर्च@जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय में ही शासन की योजना का लाभ लेने लोगों को सालो का इंतजार करना पड़ता है। इसका उदाहरण केजा बाई के वृद्धा पेंशन में नाम जोड़ने के मामले को कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। सरकार द्वारा गरीबों की सुविधा के लिए विभिन्न प्रकार की योजना संचालित जा रही है, जिसके लिए करोड़ो रुपए पानी की तरह बहाए जाते हैं। इसके बावजूद गरीबों की इन योजनाओं पर पलीता लग रहा है। सरकारी कर्मचारी इनपर पानी फेरने कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इससे सुविधाओं का लाभ पाने गरीब जनता सरकारी कारिंदों के सामने असहाय नजर आती है।मुख्यालय के वार्ड 09 की निवासी केजा बाई यादव पति रामगोपाल 70 वर्ष की उम्र में लाठी के सहारे पेंशन की सूचि में नाम जुड़वाने के लिए तीन साल से प्रतीक्षा कर मांग कर अपना जीवन यापन कर रही है।
लाठी टेक गुहार लगाने गई थी कलेक्टोरेट
खाली पैर लाठी के सहारे कलेक्टर आफिस में वृद्धा ने कई मर्तबा पेंशन के लिए आवेदन जमा किया है। इसके बाद भी अब तक उसे लाभ नहीं मिला। इससे कर्मचारियों की लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना रवैया उजागर हो रहा है। पेंशन के लिए नाम जुड़वाने कार्यालय में कर्मचारियों को आवेदन दे चुकी है। जिसपर मौजूद कर्मचारी ने नाम जुड़ जाने का आश्वाशन दिया था। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब जिला मुख्यालय में निवासरत लोगों को योजनाओं का लाभ लेने इतनी मशक्कत करनी पड़ती है तो दूरदराज से आए ग्रामीणों का काम करने दफ्तर के कर्मचारी कितनी गंभीरता दिखाते होंगे।
मांग कर खाने मजबूर, व्यवस्था की खुल रही पोल
पेंशन की चाह लिए केजाबाई का जीवन यापन मांगकर होता है। ऐसे में प्रशासन की व्यवस्था पर कई तरह के प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। वृद्धा ने अपना नाम पेंशन की सूचि में जुड़वाने के लिए राशन कार्ड भी दिया। कार्यालय में उपस्थित कर्मचारी ने उसका आवेदन पत्र भरकर जमा करने की बात भी कही और घर तक सुविधा देने की बात कही और वह अपने घर जाकर उस दिन का इंतजार करने लगी के कब कर्मचारी आकर उसका पेंशन का खाता दे जिससे उसका आर्थिक तंगी कम हो जाए। लेकिन समय बीतने लगा पर उसका काम आगे नहीं बढ़ा और वह मांगकर ही अपना गुजारा कर रही है।
खाली पैर लाठी के सहारे कलेक्टर आफिस में वृद्धा ने कई मर्तबा पेंशन के लिए आवेदन जमा किया है। इसके बाद भी अब तक उसे लाभ नहीं मिला।


