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दुर्गम गांवों में भी मलेरिया जांच एवं उपचार, कई बाधाओं को पार कर पहुंचा स्वास्थ्य अमला

न्यूज़ सर्च@रायपुर:- मलेरियामुक्त बस्तर अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर दुर्गम एवं पहुंचविहीन गांवों में मलेरिया की जांच एवं इलाज किया। इन गांवों में कुछ दिन रूक कर उन्होंने मलेरिया के साथ ही लोगों की विभिन्न स्वास्थ्यगत परेशानियों का भी उपचार कर दवाईयां दी। कई गांवों तक पहुंचने के लिए दल को छोटे-छोटे नावों से नदी पार करनी पड़ी। सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के दुर्गम एवं दूरस्थ गांव गोगुंडा में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहाड़ पर 15 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई कर मलेरिया जांच के लिए पहुंची। टीम ने वहां तीन दिनों तक कैंप कर 856 लोगों की जांच की। कैंप के दौरान 87 बच्चों को टीके लगाने के साथ ही लोगों का परीक्षण कर उनकी स्वास्थ्यगत परेशानियों का उपचार किया। वहां 28 साल बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची थी।
दंतेवाड़ा जिले के चेरपाल उपस्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ एएनएम श्रीमती संत कुमारी रोजाना 20-25 किमी पैदल चलकर मलेरिया का इलाज करने अनेक गांवों में अपनी टीम के साथ पहुंची। उन्हें रोज इंद्रावती नदी पार कर अपने टीम के साथियों ओमेश और होमेन्द्र के साथ दुर्गम रास्तों पर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड में स्वास्थ्य विभाग की टीम 19 किमी पैदल चलकर झिल्ली और किसकिल गांव पहुंची। वहां जाने के लिए टीम को दुर्गम रास्तों पर नदी पार करने के पहले 12 किमी और नदी पार करने के बाद सात किमी पैदल चलना पड़ा। नारायणपुर जिले के ओरछा के जाटलोर सेक्टर में मलेरिया जांच और उपचार के लिए टीम को जंगलों के बीच पहाड़ी रास्तों पर कुल 116 किमी सफर करना पड़ा।

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