न्यूज़ सर्च@रायपुर:- अभियान में स्वास्थ्य अमला इंद्रावती नदी के उस पार अबूझमाड़ के कई गांवों तक भी पहुंचा। नारायणपुर के ओरछा विकासखंड के दुरूह गांव जहां पहुंचने के लिए बीजापुर के भैरमगढ़ के रास्ते इंद्रावती पार कर आते हैं, वहां तक पहुंचना टीम लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। विषम परिस्थितियों में भी टीम के लोग रात 10 बजे तक काम करते थे। किसी भी गांव में बिजली नहीं थी। केवल एक गांव में सोलर लाइट थी।
बीजापुर जिले में भी टीम तीन दिन में 52 किमी चलकर पहुंचविहीन गांव में पहुंची। वहां बेदरे से दुर्गम रास्तों के बीच 6 किमी दूर लेंका, 3 किमी बूमरा, 20 किमी रासमेटा और 4 किमी करांगूल में टीम ने लोगों का रक्त परीक्षण कर मलेरिया पीड़ितों का इलाज किया। लेंका से 15 किमी का सफर तय कर टीम पड़मेटा भी पहुंची। बेदरे से पड़मेटा तक इस पूरे सफर की लंबाई 52 किमी थी। खाने-पीने की समस्या के मद्देनजर तीन दिन की रसद और मलेरिया के अतिरिक्त इन इलाकों में आमतौर पर होने वाली बीमारी की दवा भी टीम के लोगों ने साथ में रखी थी।
बीजापुर जिले में भी टीम तीन दिन में 52 किमी चलकर पहुंचविहीन गांव में पहुंची। वहां बेदरे से दुर्गम रास्तों के बीच 6 किमी दूर लेंका, 3 किमी बूमरा, 20 किमी रासमेटा और 4 किमी करांगूल में टीम ने लोगों का रक्त परीक्षण कर मलेरिया पीड़ितों का इलाज किया। लेंका से 15 किमी का सफर तय कर टीम पड़मेटा भी पहुंची। बेदरे से पड़मेटा तक इस पूरे सफर की लंबाई 52 किमी थी। खाने-पीने की समस्या के मद्देनजर तीन दिन की रसद और मलेरिया के अतिरिक्त इन इलाकों में आमतौर पर होने वाली बीमारी की दवा भी टीम के लोगों ने साथ में रखी थी।



